हिन्दी (भाग-II)

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Question 1 / 15
QUESTION 31
यण् संधि की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए:
A
जात्यभिमान = जाती + अभिमान
B
पर्युषण = परि + ऊषण
C
वध्विच्छा = वधू + इच्छा
D
महैन्द्रजालिक = महा + ऐन्द्रजालिक
QUESTION 32
किस शब्द में 'कु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है?
A
कुजन
B
कुमार
C
कुचेष्टा
D
कुमति
QUESTION 33
समश्रुत भिन्नार्थक शब्द 'मनुजात - मनुजाद' का क्रमशः सही अर्थ चुनिए:
A
मनुष्य को खाने वाला, मनुष्य से पैदा हुआ
B
मनु से उत्पन्न हुआ, अफ्रीकी निवासी
C
मनु से उत्पन्न, मनुष्य को खाने वाला
D
मनुज का पुत्र, मनुज से संबंध रखने वाला
QUESTION 34
किस विकल्प में विलोम-युग्म सही नहीं है?
A
वैमनस्य - सौमनस्य
B
अभिमानी - निरभिमानी
C
अभ्यर्थी - मूर्खार्थी
D
स्वार्थी - निस्वार्थ
QUESTION 35
निम्न में से असंगत को चुनिए:
A
अं, अः - अयोगवाह व्यंजन
B
ङ, ञ - उल्लिप्त व्यंजन
C
श, ष, स - स्पर्श संघर्षी
D
ऐ, औ - अर्थ संवृत्त
QUESTION 36
निम्न में से प्रक्षेपित शिक्षण सहायक सामग्री नहीं है:
A
दूरदर्शन
B
फिल्म स्ट्रीप
C
ओवरहेड प्रोजेक्टर
D
फिल्म
QUESTION 37
निम्न में से 'शिक्षण-सूत्र' नहीं है:
A
पूर्ण से अंश की ओर
B
प्रेरणा से तर्क की ओर
C
स्थूल से सूक्ष्म की ओर
D
उपर्युक्त सभी
QUESTION 38
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए:
A
ई - द्रौपदी, जानकी, वाल्मीकि
B
य - माहात्म्य, वैधव्य, पौलस्त्य
C
तर - महत्तर, वृहत्तर, दृढतर
D
एय - भागिनेय, पाथेय, वैनतेय
QUESTION 39
तत्सम-तद्भव शब्दों के संदर्भ में अनुपयुक्त विकल्प चुनिए:
A
गत - गइया
B
जृम्भिका - जवाँई
C
चर्मचटक - चमगादड़
D
परिकूट - परकोटा
QUESTION 40
समस्तपद एवं समास विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए:
A
लोकप्रिय - अधिकरण तत्पुरुष
B
पवन से चलने वाली चक्की - पनचक्की
C
नवयुवक - नव है जो युवक
D
परीक्षाभवन - परीक्षा के लिए भवन
QUESTION 41
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए: हमें इस बात को समझना होगा कि युद्ध की अनुपस्थिति ही शांति की परिभाषा नहीं है। बुद्ध ने जिस शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना की थी, उसमें समानता का वह संदेश भी शामिल था, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाने का हर प्रयास मनुष्यता का शत्रु है। ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल बनाना मनुष्योचित तो है, एक शर्त भी है मनुष्य के रूप में जीने की। हमारी चिंता यह होनी चाहिए कि हमें स्वयं को मनुष्य कैसे बनाएं एवं कैसे मनुष्य बनाए रखें। मनुष्य बनने का अर्थ है - अपने भीतर दूसरे की पीड़ा को समझने का अहसास जगाना, अपने भीतर करुणा का वह भाव जगाना, जो हमें दूसरे से जोड़ता है। छोटे-छोटे पुल बनाने होंगे हमें दूसरे से जुड़ने के लिए - करुणा का पुल, मैत्री का पुल, समानता का पुल, विषमता मिटाने वाला पुल ............. ऐसा समझकर ही हम मानवोचित आचरण का मंत्र अपना सकते हैं, प्रबुद्ध बन सकते हैं। लेखक के अनुसार शांति की परिभाषा नहीं है:
A
युद्ध की अनुपस्थिति
B
शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना
C
जिसमें समानता का संदेश सम्मिलित हो
D
स्वयं को मनुष्य बनाना
QUESTION 42
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए: हमें इस बात को समझना होगा कि युद्ध की अनुपस्थिति ही शांति की परिभाषा नहीं है। बुद्ध ने जिस शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना की थी, उसमें समानता का वह संदेश भी शामिल था, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाने का हर प्रयास मनुष्यता का शत्रु है। ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल बनाना मनुष्योचित तो है, एक शर्त भी है मनुष्य के रूप में जीने की। हमारी चिंता यह होनी चाहिए कि हमें स्वयं को मनुष्य कैसे बनाएं एवं कैसे मनुष्य बनाए रखें। मनुष्य बनने का अर्थ है - अपने भीतर दूसरे की पीड़ा को समझने का अहसास जगाना, अपने भीतर करुणा का वह भाव जगाना, जो हमें दूसरे से जोड़ता है। छोटे-छोटे पुल बनाने होंगे हमें दूसरे से जुड़ने के लिए - करुणा का पुल, मैत्री का पुल, समानता का पुल, विषमता मिटाने वाला पुल ............. ऐसा समझकर ही हम मानवोचित आचरण का मंत्र अपना सकते हैं, प्रबुद्ध बन सकते हैं। लेखक के अनुसार मनुष्य बनने का क्या अर्थ है?
A
बुद्धोपदिष्ट राह का अननुगामी
B
मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाना
C
दूसरे की पीड़ा को समझने का भाव जगाना
D
प्रबुद्ध मानवोचित आचरण
QUESTION 43
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए: हमें इस बात को समझना होगा कि युद्ध की अनुपस्थिति ही शांति की परिभाषा नहीं है। बुद्ध ने जिस शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना की थी, उसमें समानता का वह संदेश भी शामिल था, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाने का हर प्रयास मनुष्यता का शत्रु है। ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल बनाना मनुष्योचित तो है, एक शर्त भी है मनुष्य के रूप में जीने की। हमारी चिंता यह होनी चाहिए कि हमें स्वयं को मनुष्य कैसे बनाएं एवं कैसे मनुष्य बनाए रखें। मनुष्य बनने का अर्थ है - अपने भीतर दूसरे की पीड़ा को समझने का अहसास जगाना, अपने भीतर करुणा का वह भाव जगाना, जो हमें दूसरे से जोड़ता है। छोटे-छोटे पुल बनाने होंगे हमें दूसरे से जुड़ने के लिए - करुणा का पुल, मैत्री का पुल, समानता का पुल, विषमता मिटाने वाला पुल ............. ऐसा समझकर ही हम मानवोचित आचरण का मंत्र अपना सकते हैं, प्रबुद्ध बन सकते हैं। गद्यांश में प्रयुक्त पदों की व्याकरणिक विवेचना के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए:
A
अनुपस्थिति - दो उपसर्ग
B
मनुष्यता - जातिवाचक संज्ञा
C
प्रत्येक - अव्ययीभाव समास
D
विषमता - व्यंजन संधि
QUESTION 44
'पर्यायवाची' की दृष्टि से असंगत को चुनिए:
A
तरंग - ऊर्मि, वीचि, कल्लोल
B
तरिण - नौका, द्रोणी, करवाल
C
तोता - रक्ततुण्ड, कीर, सुग्गा
D
योनि - अपत्यपथ, जन्मवर्त्म, रतिकुहर
QUESTION 45
असंगत विकल्प चुनिए:
A
समुद्र में लगने वाली आग - दावानल
B
लोक-प्रचलित बात, जिसके वक्ता का पता न हो - किंवदन्ती
C
पशुओं द्वारा जुगाली करने की प्रक्रिया - पागुर
D
जिसके पति ने दूसरा विवाह कर लिया हो - अध्यूढा